देश का वो वीर जो अपनी पहली सैलरी लेने से पहले ही हो गया शहीद, पढ़िए पूरी कहानी

 


देश का वो वीर जो अपनी पहली सैलरी लेने से पहले ही हो गया शहीद, पढ़िए पूरी कहानी

22 दिनों तक कैप्टन सौरभ कालिया और पांच जवानों को लोहे की गर्म रॉड और सिगरेट से दागा गया. आंखें निकाली दी गईं और कान को भी सलाखों से दागा गया. आज भी उनके माता-पिता ने बेटे का हर सामान घर में बने मंदिर में सहेज कर रखा है.

कैप्टन कालिया के माता-पिता उन्हें यूनिफॉर्म में नहीं देख पाए थे.

जब आप 22 साल के होते हैं तो कई तरह की बातें सोचते होंगे. अपने करियर को लेकर, अपनी जॉब को लेकर, अपने आने वाले समय को लेकर और इंटरनेट पर अक्सर इससे जुड़ी बातों को खंगालते रहते होंगे. लेकिन शहीद कैप्टन सौरभ कालिया इतनी सी उम्र में अपने मां-बाप और अपने दोस्तों को अलविदा कह गए थे. कारगिल की जंग का जिक्र जब-जब होगा तब-तब कैप्टन सौरभ कालिया की कहानी जरूरी सुनाई जाएगी. 29 जून को कैप्टन कालिया का 45वां जन्मदिन था. इस मौके पर वो तो अपने माता-पिता के साथ नहीं थे मगर उन्होंने अपने लाडले को इतना याद किया कि लगा ही नहीं वो अब इस दुनिया में नहीं है.

एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के टॉपर

कैप्टन सौरभ कालिया के पैरेंट्स, हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में रहते हैं. पिता डॉक्टर एनके कालिया और मां विजया कालिया के लिए पिछले 22 सालों में एक भी दिन ऐसा नहीं था, जब उन्होंने बेटे को याद नहीं किया हो.

अमृतसर में जन्में कैप्टन कालिया ने पालमपुर के डीएवी पब्लिक स्कूल से पढ़ाई की और उसके बाद सन् 1997 में हिमाचल प्रदेश एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हुए. वो पढ़ाई में इतने तेज थे के पूरे एकेडमिक करियर में उन्हें स्कॉलरशिप मिलती रही.

एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से बीएससी और M.ed करने के बाद उन्होंने सेना में जाने का फैसला किया. 12 दिसंबर 1998 को इंडियन मिलिट्री एकेडमी से ग्रेजुएट होने के बाद उन्हें 4 जाट रेजीमेंट में पोस्टिंग मिली. पहली पोस्टिंग कारगिल सेक्टर में थी. जनवरी 1999 के मध्य में वो कारगिल पहुंचे थे.

पहली पोस्टिंग कारगिल सेक्टर

कैप्टन सौरभ कालिया के पिता डॉक्टर एनके कालिया को याद है कि उनका बेटा अपनी पहली पोस्टिंग को लेकर बहुत ही एक्साइटेड था. कारगिल में पोस्टिंग के दौरान कैप्टन कालिया 5 मई 1999 को वह अपने पांच साथियों अर्जुन राम, भंवर लाल, भीखाराम, मूलाराम, नरेश के साथ बजरंग पोस्ट पर पेट्रोलिंग कर रहे थे, तभी पाकिस्तानी घुसपैठियों ने उन्हें बंदी बना लिया. 22 दिनों तक कैप्टन कालिया और पांच जवानों को लोहे की गर्म रॉड और सिगरेट से दागा गया. आंखें निकाली दी गईं और कान को भी सलाखों से दागा गया.

अधूरा रह गया बेटे को यूनिफॉर्म में देखने का सपना

जब कैप्टन कालिया का शव उनके घर पहुंचा था तो उसे देखकर उनकी मां बेहोश हो गई थीं. पिता की मानें तो बेटे की इस हालत ने उन्हें तोड़कर रख दिया था.

कैप्टन सौरभ कालिया उनके जिगर के टुकड़े थे और एकपल को तो यकीन ही नहीं हुआ के बेटे के साथ ऐसा बर्ताव हो सकता है. सेना ज्वॉइन किए हुए बस 4 माह ही हुए थे और परिवार वाले भी उन्हें यूनिफॉर्म में देखने को बेकरार थे.

मगर ऐसा हो नहीं सका. तो कैप्टन कालिया यूनिफॉर्म में अपने परिवार से मिल सके और ही अपनी पहली सैलरी देख पाए.

कैप्टन कालिया का शव बर्फ में दबा हुआ मिला था. कैप्टन कालिया और पांच जवानों के साथ जो कुछ भी हुआ वो जेनेवा संधि का उल्लंघन था. मगर भारत सरकार की तरफ से इस मामले को इंटरनेशनल कोर्ट में लड़ने से इनकार कर दिया गया.

इस पर डॉक्टर कालिया का कहना है कि ऐसा लगता है कि इस देश में सैनिकों की कद्र कम होती जा रही है. अगर ऐसा ही रहा तो शायद नौजवान पीढ़ी का भरोसा कम हो जाएगा फिर देश की रक्षा करने वाले बहादुर भी कम मिलेंगे.

कोर्समेट भी करते हैं याद

कैप्टन कालिया के एक कोर्समेट जो इस समय कर्नल की रैंक पर हैं और फारवर्ड लोकेशन पर तैनात हैं, उन्हें आज भी उनकी याद सताती है. वो बताते हैं कि बाकी यंगस्टर्स की ही तरह शहीद कालिया भी अपनी पहली सैलरी का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. कोर्समेट की मानें तो कैप्टन कालिया बहुत ही जिंदादिल युवा थे और हर पल कुछ ऐसा करते थे कि उन्हें देखने वाले उनसे प्रेरित होते. उन्होंने कहा, ‘मैं आज भी अपने दोस् को बहुत मिस करता हूं. एकेडमी में हम साथ थे. काश आज भी साथ होते.’

 

Comments

  1. 🙏🙏🙏 शत शत नमन है हमारे देश के वीर जवानों को ...

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