मेंहदीपुर बालाजी

 
                       (मंदिर के भीतर मेहंदीपुर भैरवजी की मूर्ति)

भूतों से मुक्ति के लिए लोग दौड़े चले आते हैं मेंहदीपुर बालाजी, विज्ञान नहीं रखता इससे इत्तेफाक

एक मेंहदीपुर बालाजी राजस्थान के दौसा जिला में स्थित हैं। दो पहाड़ियों के बीच बने इस मंदिर की लोगों के बीच काफी महत्ता है। यहां भक्ति के साथ अंधविश्वास के उदाहरण भी देखने को मिलते हैं। मान्यता है कि लोगों का कहना है कि बालाजी मंदिर में ऊपरी हवाओं, दुष्ट आत्माओं, भूत-प्रेतों से छुटकारा मिल जाता है।

दौसा (राजस्थान): हनुमानजी के लाखों प्रसिद्ध मंदिरों में से एक मेंहदीपुर बालाजी राजस्थान के दौसा जिला में स्थित हैं। दो पहाड़ियों के बीच बने इस मंदिर की लोगों के बीच काफी महत्ता है। यहां भक्ति के साथ आस्था के उदाहरण भी देखने को मिलते हैं। मान्यता है कि बालाजी मंदिर में ऊपरी हवाओं, दुष्ट आत्माओं, भूत-प्रेतों से छुटकारा मिल जाता है।

 

यहां की संकरी गलियां हनुमान जी की भक्ति में डुबोती हैं। हनुमान जी के मंदिर के साथ एक राम मंदिर भी है, जहां भगवान श्रीराम और भगवती सीता की खूबसूरत प्रतिमाएं हैं, जो काफी आकर्षक दिखती हैं। इसी मंदिर के साथ हनुमान जी की बड़ी-सी प्रतिमा है, हालांकि इस मंदिर का निर्माण कार्य अभी चल रहा है, लेकिन हनुमान जी की यह विशाल प्रतिमा भक्तों को आकर्षित करने वाली लगती है।

 

मेंहदीपुर बालाजी धाम भगवान हनुमान के 10 प्रमुख सिद्धपीठों में गिना जाता है। मान्यता है कि इस स्थान पर हनुमानजी जागृत अवस्था में विराजते हैं। श्रद्धालुओं के बीच मेंहदीपुर बालाजी को दुष्ट आत्माओं से छुटकारा दिलाने वाले दिव्य शक्ति से प्रेरित शक्तिशाली मंदिर माना जाता है।

 

मंदिर के पास भोग भंडार बालाजी नाम की दुकान पर प्रसाद बेचने वाले जितेंद्र का कहना है, "यहां बहुत से ऐसे लोग आते हैं, जिन पर भूत-प्रेत का साया होता है। रात 10 बजे मंदिर बंद होने के बाद वे धर्मशाला लौट जाते हैं।"

 

यह सत्य है या ढकोसला? इस पर जितेंद्र कहते हैं, "पता नहीं, सचमुच भूत बाधा है या लोग यूं ही ऐसा करते हैं।"

 

वहीं एक अन्य स्थानीय दुकानदार सुरेश का कहना है, "लोगों में भूतों की आत्मा आने की बात बिल्कुल सही है और लोग यहां आकर बिल्कुल ठीक हो जाते हैं। यहां 4-5 दिनों में असर दिखने लगता है। मैं गारंटी देता हूं कि यहां आकर हर तरह का भूत, ऊपरी हवा का प्रकोप ठीक हो जाता है।

 

मंदिर में चढ़ावे को लेकर उनका कहना है, "यहां सिर्फ प्रसाद चढ़ाया जाता है और कोई पैसा-वैसा नहीं लगता।"

 

प्रसाद घर ले जाने के बारे में वे कहते हैं, "यहां से प्रसाद घर ले जाने पर भूत-प्रेत का साया साथ जाने का डर रहता है, इसलिए यहां से भोग लगा हुआ प्रसाद नहीं ले जाना चाहिए।"

हालांकि, विशेषज्ञ इस बात को पूरी तरह नकारते हैं। जाने-माने मनोचिकित्सक डॉ. समीर पारिख कहते हैं, "अलग-अलग तरह के मामले हैं, सभी को अलग तरह से देखा जाता है।

 

लोग इस बारे में समझते हैं कि इसके पीछे कोई और कारण है। ज्यादातर मामलों की वजह मानसिक बीमारियां होती हैं।"

 

वे कहते हैं, "ऐसा केमिकल इम्बेरेस के कारण होता है, जो हमारे नियंत्रण में नहीं होती। ये एक हिस्सा है, दूसरा हिस्सा है कि हम-आप जिस बैगग्राउंड से हैं, कल्चर से हैं, आपके आसपास के सोशल नेटवर्क है। उन लोगों के अंदर अगर कोई मजबूत विश्वास होता है तो आपके अंदर भी वहीं विश्वास आने की टेंडेंसी बढ़ जाती है।"

 

उन्होंने कहा, "आप अगर ऐसी जगह पले-पढ़े हैं, जहां ज्यादातर लोग भूत-प्रेतों, ऊपरी हवा को मानते हैं, तो ये उनमें ज्यादा होता है और जब आपके आसपास के लोग उस बारे में सोचते हैं तो आप भी उसी तरह से सोचने लग जाते हैं।"

 

डॉ. पारिख ने कहा, "विश्वास का अपना महत्व है, लेकिन विश्वास के साथ तथ्यों का भी इस्तेमाल करना आना चाहिए, जिससे किसी को कोई परेशानी आए तो उसका समाधान मिल सके।"

 

बालाजी मंदिर में आरती, ढोल-नगाड़े बजने के समय ये चीजें और भी सक्रिय हो जाती हैं। इसकी क्या वजह है? इस सवाल पर उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि ऐसा कुछ होता है। मेरा मानना है कि सामाजिक तौर-तरीके इस पर निर्भर करते हैं। जो चीजें मन में बैठी रहती हैं, हमें आभास होता है कि वही सब हमारे सामने हो रहा है।"

 

उन्होंने कहा, "दरअसल, विश्वास अपने आप में एक मजबूत पहलू है। विश्वास का अपना महत्व है, लेकिन हर मामले का दूसरा पहलू भी होता है। कुछ में मेडिकल ट्रीटमेंट से भी छुटकारा पाया जा सकता है।"

 

श्रद्धालुओं की इस विषय पर अलग-अलग तरह की विचारधारा है। कुछ लोग ऐसी धारणा का कारण मानसिक बीमारी मानते हैं तो कुछ का कहना है कि यह सब सोलह आने सच हैं।

मेंहदीपुर बालाजी

मेंहदीपुर बालाजी मन्दिर राजस्थान के तहसील (सिकरायमें स्थित हनुमान जी का एक प्रसिद्ध मन्दिर है। "बाला" का अर्थ है - "जो सदा ही शत्रुओं से विजयी रहे" भारत के कई भागों में हनुमान जी को 'बालाजी' कहते हैं। यह स्थान दो पहाड़ियों के बीच बसा हुआ बहुत आकर्षक दिखाई देता है। यहाँ की शुद्ध जलवायु और पवित्र वातावरण मन को बहुत आनंद प्रदान करती है। यहाँ नगर-जीवन की रचनाएँ भी देखने को मिलेंगी।

 

मेंहदीपुर बालाजी (हनुमान) मन्दिर

बालाजी मंदिर

मुख्य मन्दिर में हनुमान की मूर्ति

धर्म संबंधी जानकारी

सम्बद्धता

हिंदू धर्म

देवता

हनुमानजी

अवस्थिति जानकारी

अवस्थिति

मेंहदीपुरटोडाभीम (हिन्डौं के निकट)

ज़िला

दौसा, करौली

राज्य

राजस्थान

देश

भारत

 

बालाजी की प्रकट होने की धारणा

यहाँ तीन देवों की प्रधानता हैश्री बालाजी महाराज, श्री प्रेतराज सरकार और श्री कोतवाल (भैरव) यह तीन देव यहाँ आज से लगभग १००० वर्ष पूर्व प्रकट हुए थे। इनके प्रकट होने से लेकर अब तक तेरह महंत इस स्थान पर सेवा-पूजा कर चुके हैं और अब इस स्थान के महंत नरेशपुरी जी इस समय भी विद्यमान हैं, जो कि श्री किशोरपुरी जी महाराज (पूर्व सेवक ब्रह्मलीन दिनांक ०९/०८/२०२१) के बाद २१/०८/२०२१ से इस गद्दी पर बैठे हैं।


अब दिनाँक २१/०८/२०२१ से यहाँ की सेवा पूजा का कार्यभार महंत श्री नरेशपुरी जी महाराज संभाल रहे हैं। मेहंदीपुर बालाजी महाराज के महंत 55 साल बाद बदले हैं। यहाँ के उत्थान का युग श्री गणेशपुरी जी महाराज के समय से प्रारम्भ हुआ और अब दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। प्रधान मंदिर का निर्माण इन्हीं के समय में हुआ। सभी धर्मशालाएँ इन्हीं के समय में बनीं। इस प्रकार इनका सेवाकाल श्री बालाजी घाटा मेंहदीपुर के इतिहास का स्वर्ण युग कहलाएगा।


प्रारम्भ में यहाँ घोर बीहड़ जंगल था। घनी झाड़ियों में द्रोर-चीते, बघेरा आदि जंगली जानवर पड़े रहते हैं।


वास्तव में इस मूर्त्ति को अलग से किसी कलाकार ने गढ़ कर नहीं बनाया है, अपितु यह तो पर्वत का ही अंग है और यह समूचा पर्वत ही मानों उसका 'कनक भूधराकार' द्रारीर है। इसी मूर्त्ति के चरणों में एक छोटी-सी कुण्डी थी, जिसका जल कभी बीतता ही नहीं था। रहस्य यह है कि महाराज की बायीं ओर छाती के नीचे से एक बारीक जलधारा निरन्तर बहती रहती है जो पर्याप्त चोला चढ़ जाने पर भी बंद नहीं होती।

 

इस प्रकार तीनों देवों की स्थापना हुई। विक्रमी-सम्वत् १९७९ में श्री महाराज ने अपना चोला बदला। उतारे हुए चोले को गाड़ियों में भरकर श्री गंगा में प्रवाहित करने हेतु बहुत से श्रद्धालु चल दिये। चोले को लेकर जब मंडावर रेलवे स्टेशन पर पहुँचे तो रेलवे अधिकारियों ने चोले को सामान समझकर सामान-शुल्क लेने के लिए उस चोले को तौलना चाहा, किन्तु वे तौलने में असमर्थ रहे। चोला तौलने के क्रम में वजन कभी एक मन बढ़ जाता तो कभी एक मन घट जाता; अन्तत: रेलवे अधिकारी ने हार मान लिया और चोले को सम्मान सहित गंगा जी को समर्पित कर दिया गया। उस समय हवन, ब्राह्मण भोजन एवं धर्म ग्रन्थों का पारायण हुआ और नये चोले में एक नयी ज्योति उत्पन्न हुई, जिसने भारत के कोने-कोने में प्रकाश फैला दिया।

 

आवागमन के साधन

राजस्थान राज्य के दो जिलों (करौली  दौसा) में विभक्त घाटा मेंहदीपुर स्थान दिल्ली-जयपुर-अजमेर-अहमदाबाद लाइन पर स्थित बाँदीकुई रेलवे स्टेशन से २४ मील की दूरी पर स्थित है। इसी प्रकार बड़ी लाइन के हिंडोन स्टेशन से भी यहाँ के लिए बसें मिलती हैं। अब तो आगरामथुरावृन्दावनअलीगढ़ आदि से सीधी बसें जो जयपुर जाती हैं वे बालाजी के मोड़ पर रूकती हैं। फ्रंटीयर मेल से महावीर जी स्टेशन पर उतर कर भी हिंडोन होकर बस द्वारा बालाजी पहुँचा जा सकता है। हिंडोन सिटी स्टेशन पश्चिम रेलवे की बड़ी लाइन पर बयाना और महावीर जी स्टेशन के बीच दिल्ली, मथुरा, कोटा, रतलाम, बड़ोदरा, मुंबई लाइन पर स्थित है। हिंडोन से सवा घण्टे का समय बालाजी तक बस द्वारा लगता है।




Comments

  1. Pratyaksh ko praman nahin hota yah ek Satya tirath dham hai

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